खंडवा। डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय, खंडवा में 1 जून 2026 को स्टेम-पावर्ड सैटेलाइट एक्सप्लोरेशन: हैंड्स-ऑन
वेदर मॉनिटरिंग मिनी-सैटेलाइट वर्कशॉप (वीमोसैट एवं रीमोसैट)" विषय पर एक विशेष तकनीकी कार्यशाला का आयोजन किया
गया। कार्यशाला का उद्देश्य विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित किए जाने वाले रियल-टाइम जियोस्टेशनरी सैटेलाइट रिसेप्शन सिस्टम की कार्यप्रणाली, उपयोगिता तथा संचालन प्रक्रिया से प्रतिभागियों
को अवगत कराना था।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप
में भारतीय
अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. सतीश सेतुमाधव राव उपस्थित रहे। अपने प्रेरणादायक एवं ज्ञानवर्धक
संबोधन में उन्होंने भारत के गौरवपूर्ण अंतरिक्ष अभियानों—चंद्रयान-1, मंगलयान और रिसोर्ससैट—से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने
मिनी-सैटेलाइट किट्स के माध्यम से अंतरिक्ष विज्ञान की जटिल अवधारणाओं को सरल, रोचक एवं व्यावहारिक तरीके से समझाया।
डॉ. राव ने विश्वविद्यालय के
शोधकर्ताओं, कृषि
वैज्ञानिकों एवं विज्ञान संकाय के सदस्यों को सैटेलाइट डेटा के संग्रहण, विश्लेषण तथा मौसम निगरानी प्रणाली की
कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आधुनिक शोध, कृषि प्रबंधन, आपदा पूर्वानुमान तथा पर्यावरणीय अध्ययन में
सैटेलाइट आधारित तकनीकों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय
के कुलसचिव श्री
रवि चतुर्वेदी द्वारा
मुख्य अतिथि डॉ. सतीश सेतुमाधव राव के स्वागत एवं परिचय से हुई। इसके पश्चात डॉ. योगेश महाजन (डीन अकादमिक), डॉ. सीमा शर्मा (निदेशक, रिसर्च एंड इनोवेशन डिवीजन) तथा डॉ. गणेश मलगाया
(हेड, आर एंड
डी फार्म) ने
अपने विचार व्यक्त करते हुए इस पहल को विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के लिए
अत्यंत उपयोगी बताया।
विश्वविद्यालय के माननीय कुलगुरु डॉ. अरुण रमेश जोशी ने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार की तकनीकी एवं अनुसंधान-आधारित कार्यशालाएँ विद्यार्थियों और शिक्षकों को नवीन वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल विश्वविद्यालय में अनुसंधान, नवाचार और अंतरिक्ष विज्ञान से संबंधित गतिविधियों को नई दिशा प्रदान करेगी।
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को WeMoSat एवं ReMoSat प्रणाली के तकनीकी पहलुओं का व्यावहारिक प्रदर्शन
भी कराया गया, जिससे
उन्हें वास्तविक समय में मौसम संबंधी डेटा प्राप्त करने और उसका विश्लेषण करने की
प्रक्रिया को समझने का अवसर मिला।
कार्यक्रम के समापन पर एक विस्तृत
प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें संकाय सदस्यों एवं शोधार्थियों ने
सैटेलाइट रिसेप्शन सिस्टम की स्थापना, डेटा उपयोगिता तथा भविष्य की शोध संभावनाओं से
जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे। डॉ. राव ने सभी जिज्ञासाओं का विस्तारपूर्वक समाधान
किया।
कार्यक्रम का सफल संचालन प्रो. आदित्य गिरोठिया एवं प्रो. संदेश कुमार द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इस अवसर पर
विश्वविद्यालय के शिक्षकगण, शोधार्थी
एवं विभिन्न संकायों के विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
यह कार्यशाला विश्वविद्यालय में
अंतरिक्ष विज्ञान, मौसम
विज्ञान एवं सैटेलाइट आधारित अनुसंधान को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण
कदम सिद्ध हुई। इससे विद्यार्थियों एवं शोधकर्ताओं को अत्याधुनिक तकनीकों से
परिचित होने तथा भविष्य में नवाचार आधारित शोध कार्यों के लिए प्रेरणा प्राप्त
होगी।