खंडवा। डॉ. सीवी रमन विश्वविद्यालय के
रामन इनक्यूबेशन सेंटर द्वारा आयोजित 5 दिवसीय खाद्य प्रसंस्करण प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक
सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का संयुक्त आयोजन
विश्वविद्यालय द्वारा म.प्र. राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (MP SRLM) के सहयोग से किया गया । इस प्रशिक्षण
कार्यक्रम का उद्देश्य स्व-सहायता समूह (SHG) की महिलाओं को खाद्य प्रसंस्करण,
मूल्य संवर्धन एवं स्वरोजगार से जोड़ना
था।
उक्त जानकारी देते हुए कुलसचिव श्री रवि
चतुर्वेदी ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को प्याज पाउडर, टमाटर पाउडर एवं अन्य खाद्य उत्पादों के
निर्माण की व्यवहारिक एवं सैद्धांतिक जानकारी प्रदान की गई। प्रतिभागियों को कच्चे
माल की पहचान, धुलाई,
स्लाइसिंग, ड्राइंग, ग्राइंडिंग, पैकेजिंग, गुणवत्ता नियंत्रण एवं मशीन संचालन का
प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही महिलाओं को उद्यमिता, स्टार्टअप, वैल्यू एडिशन एवं एंजेल इन्वेस्टर के
विषय में भी जागरूक किया गया।
कुलगुरु डॉ. अरुण रमेश जोशी ने कहा कि
ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनके कौशल विकास को
बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को
निरंतर अभ्यास कर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
प्रशिक्षण के समापन सत्र में कुलगुरु
डॉ. अरुण रमेश जोशी, कुलसचिव
श्री चतुर्वेदी, जिला
परियोजना प्रबंधक आनंद स्वरूप शर्मा, राष्ट्रीय ग्रामीण
आजीविका मिशन जिला प्रबंधक (कृषि) अंकिता जैन एवं वनमाली सृजन पीठ की संयोजिका
श्रीमती गीतिका चतुर्वेदी की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर महिलाओं ने अपने
अनुभव साझा करते हुए बताया कि इस प्रशिक्षण से उन्हें आत्मविश्वास, तकनीकी ज्ञान एवं स्वरोजगार की नई दिशा
प्राप्त हुई है। प्रतिभागियों ने भविष्य में समूह आधारित खाद्य प्रसंस्करण इकाइयाँ
स्थापित करने की इच्छा भी व्यक्त की।
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने उत्साह,
अनुशासन एवं सक्रिय सहभागिता का
प्रदर्शन किया। प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें स्थानीय संसाधनों के उपयोग द्वारा
आय संवर्धन एवं आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रेरित किया गया। इस प्रशिक्षण का
उद्देश्य नवाचार एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण के माध्यम से कौशल विकास को बढ़ावा देना
था।
कार्यक्रम के मुख्य अन्वेषक श्री दीपक
कौशल थे। डॉ. गणेश मलगाया, श्री
विवेक माहेश्वरी, श्री
चंदन सिंह चौहान एवं इनक्यूबेशन सेंटर की सम्पूर्ण टीम ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के
सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को
नियमित अभ्यास, गुणवत्ता
बनाए रखने एवं सामूहिक रूप से कार्य करने हेतु प्रेरित किया गया तथा उन्हें
प्रशिक्षण पूर्णता का प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम
महिलाओं के कौशल विकास, ग्रामीण
उद्यमिता एवं आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ।