आईसीएसएसआर एवं डॉ. सीवी रामन विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में पाँच दिवसीय आयोजन संपन्न

Event Time & Date - Sun, May 24,2026

खंडवा। डॉ. सीवी रामन विश्वविद्यालय एवं भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित पाँच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का सफल समापन हुआ। “कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल अर्थव्यवस्था एवं सतत व्यवसाय : वाणिज्य और प्रबंधन में उभरती प्रवृत्तियाँ” विषय पर आधारित इस सेमिनार में देश-विदेश के विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती पूजन एवं अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ। सेमिनार के संयोजक एवं विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. योगेश महाजन ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि निमाड़ अंचल में इस प्रकार का यह पहला अंतरराष्ट्रीय आयोजन है, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं आधुनिक तकनीकों के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में एआई केवल तकनीक नहीं, बल्कि शिक्षा, शोध, व्यापार एवं सामाजिक विकास का प्रभावशाली माध्यम बन चुका है।

विश्वविद्यालय के कुलसचिव श्री रवि चतुर्वेदी ने अपने उद्बोधन में आईसेक्ट समूह की प्रेरणादायी यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि आईसेक्ट समूह के संस्थापक श्री संतोष चौबे ने उस समय हर घर तक कंप्यूटर शिक्षा पहुँचाने का सपना देखा था, जब तकनीक केवल बड़े शहरों तक सीमित थी। उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा में कंप्यूटर शिक्षा को सरल बनाने के उद्देश्य से डॉ. संतोष चौबे द्वारा पहली बार हिंदी में “कंप्यूटर एक परिचय” पुस्तक लिखना एक ऐतिहासिक पहल थी, जिसने ग्रामीण एवं सामान्य विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि आईसेक्ट समूह ने वर्षों से शिक्षा, कौशल विकास और तकनीकी नवाचार के माध्यम से लाखों युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने का कार्य किया है।

श्री रवि चतुर्वेदी ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसे विद्यार्थियों का निर्माण करना है, जो भविष्य में “जॉब सीकर” नहीं बल्कि “जॉब गिवर” बनें। उन्होंने विद्यार्थियों से नवाचार, उद्यमिता और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाकर स्वरोजगार एवं स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

मुख्य वक्ता श्री कपिल पग्निस ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का वास्तविक उद्देश्य केवल तकनीकी विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उपयोग सतत विकास एवं समाजहित के कार्यों में प्रभावी रूप से किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि एआई हमें यह समझने का अवसर प्रदान करता है कि मशीनों एवं आधुनिक तकनीकों का उपयोग किस प्रकार मानव जीवन को अधिक सरल, उत्पादक एवं पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीकें उपलब्ध आंकड़ों एवं सूचनाओं का विश्लेषण कर बेहतर परिणाम एवं उपयोगी आउटपुट प्रदान करती हैं, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में कार्यक्षमता और गुणवत्ता दोनों में वृद्धि होती है।

श्री कपिल पग्निस ने डॉ. सीवी रामन विश्वविद्यालय एवं भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद द्वारा आयोजित इस पाँच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार की सराहना करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय समय से पहले ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे महत्वपूर्ण विषय पर गंभीर एवं दूरदर्शी पहल कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं शिक्षाविदों को भविष्य की तकनीकों को समझने और उनके सकारात्मक उपयोग के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार को सफल आयोजन के लिए बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह सेमिनार आने वाले समय में नवाचार एवं शोध की नई संभावनाओं को प्रोत्साहित करेगा।

श्री अनिल सैनी ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता चाहे कितनी भी विकसित क्यों न हो जाए, मानव बुद्धिमत्ता की आवश्यकता सदैव बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि एआई का उपयोग मानव जीवन को सरल और अधिक प्रभावी बनाने के लिए होना चाहिए, लेकिन हमें तकनीक को स्वयं पर हावी नहीं होने देना चाहिए। उन्होंने कृषि क्षेत्र में एआई की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आधुनिक तकनीकों के माध्यम से फसलों में रोगों की पहचान, स्मार्ट इरिगेशन, मौसम विश्लेषण एवं कृषि प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि एआई आधारित तकनीकें किसानों को बेहतर उत्पादन एवं संसाधनों के उचित उपयोग में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान कर रही हैं।

श्री मृणाल हुमर ने अपने संबोधन में कहा कि आज के दौर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) ग्रामीण विकास और एमएसएमई क्षेत्र के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल रही है। उन्होंने कहा कि एआई तकनीक के माध्यम से छोटे उद्योगों, स्थानीय व्यवसायों एवं स्वरोजगार को अधिक सशक्त और आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। साथ ही उन्होंने युवाओं से आधुनिक तकनीकों को अपनाकर नवाचार एवं स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एआई केवल बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

सेमिनार के संयोजक एवं विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. योगेश महाजन ने पाँच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का दिवसवार प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह आयोजन विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं शिक्षाविदों के लिए ज्ञान, नवाचार और आधुनिक तकनीकों को समझने का महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हुआ। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता वर्तमान समय की सबसे प्रभावशाली तकनीकों में से एक है, जो शिक्षा, व्यापार, प्रबंधन और ग्रामीण विकास जैसे विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से परिवर्तन ला रही है। सेमिनार के प्रत्येक दिवस को एक विशेष विषय पर केंद्रित किया गया, जिससे प्रतिभागियों को विषय की गहन जानकारी प्राप्त हो सकी।

प्रथम दिवस “बिजनेस डिसीजन मेकिंग में एआई” विषय पर आयोजित उद्घाटन सत्र में सेवानिवृत्त वरिष्ठ वैज्ञानिक श्री सतीश के. परसाई एवं डॉ. फोमिन सर्गेई मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। दोनों विशेषज्ञों ने डेटा एनालिटिक्स, निर्णय प्रक्रिया एवं आधुनिक व्यवसायिक संरचनाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। डॉ. महाजन ने कहा कि एआई के माध्यम से निर्णय प्रक्रिया अधिक सटीक, तीव्र एवं प्रभावी बन रही है, जो भविष्य के व्यवसायिक मॉडल को नई दिशा देगी।

द्वितीय दिवस “एआई-संचालित वित्तीय प्रबंधन एवं फिनटेक” विषय को समर्पित रहा। इस अवसर पर प्रो. मीनू टीटीना ने डिजिटल अर्थव्यवस्था, सुरक्षित वित्तीय लेनदेन तथा वित्तीय प्रबंधन में एआई आधारित तकनीकों के उपयोग पर विस्तृत चर्चा की। डॉ. महाजन ने कहा कि आज के डिजिटल युग में वित्तीय क्षेत्र में एआई का उपयोग पारदर्शिता, सुरक्षा एवं कार्यक्षमता को बढ़ाने में अत्यंत सहायक सिद्ध हो रहा है।

तृतीय दिवस “एआई और डिजिटल मार्केटिंग रणनीतियाँ” विषय पर आयोजित किया गया, जिसमें डॉ. मधुकान्त पटेल एवं ऑनलाइन माध्यम से जुड़े डॉ. मनीष जोशी ने अपने विचार साझा किए। विशेषज्ञों ने उपभोक्ता व्यवहार विश्लेषण, लक्षित विज्ञापन, डिजिटल ब्रांडिंग एवं मार्केटिंग ऑटोमेशन में एआई टूल्स की भूमिका को विस्तार से समझाया। डॉ. योगेश महाजन ने कहा कि डिजिटल मार्केटिंग के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने व्यवसायिक रणनीतियों को अधिक प्रभावी एवं परिणामोन्मुख बनाया है।

चतुर्थ दिवस “एआई और आपूर्ति श्रृंखला अनुकूलन” विषय पर केंद्रित रहा। इस अवसर पर मिस्टर आमोद खन्ना एवं श्रीमती चित्रा खन्ना विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वक्ताओं ने लॉजिस्टिक्स ऑटोमेशन, प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स एवं डिमांड फोरकास्टिंग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। डॉ. महाजन ने कहा कि एआई तकनीक सप्लाई चेन प्रबंधन को अधिक संगठित, पारदर्शी एवं तेज बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

समापन दिवस पर “ग्रामीण उद्यमिता और एमएसएमई विकास के लिए एआई” विषय पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। इस अवसर पर श्री कपिल पग्निस, श्री अनिल सैनी एवं श्री मृणाल हुमर ने ग्रामीण विकास, लघु उद्योगों एवं स्वरोजगार के क्षेत्र में एआई की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। डॉ. योगेश महाजन ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता केवल बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था एवं छोटे उद्यमों को भी नई दिशा देने की क्षमता रखती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को नवाचार, शोध एवं उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेंगे।

उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता केवल बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था एवं छोटे उद्यमों को भी नई दिशा देने की क्षमता रखती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के आयोजन भविष्य में शोध, नवाचार एवं उद्यमिता को नई ऊर्जा प्रदान करेंगे।

विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. अरुण रमेश जोशी ने अपने संदेश में कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता वर्तमान समय की सबसे प्रभावशाली तकनीकों में से एक है, जो शिक्षा, शोध, उद्योग और समाज के प्रत्येक क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन ला रही है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को केवल तकनीकी ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि उन्हें नवाचार, नैतिकता एवं सतत विकास की भावना से भी जोड़ना है। उन्होंने इस अंतरराष्ट्रीय सेमिनार को ज्ञान-विनिमय का महत्वपूर्ण मंच बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को वैश्विक दृष्टिकोण प्रदान करते हैं तथा उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करते हैं। उन्होंने युवाओं से एआई तकनीकों का उपयोग समाजहित, पर्यावरण संरक्षण और मानव कल्याण के लिए करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम का संचालन गौरव सोनी ने किया, जबकि आभार सीडीपीओ नेहा शुक्ला द्वारा व्यक्त किया गया। कार्यक्रम में सह-संयोजक आशीष राजपूत, रिसर्च डायरेक्टर डॉ. सीमा शर्मा, श्रीमति गीतिका चतुर्वेदी ,संदेश दफ्तरी, वरुण महाजन, अर्पिता राजपूत, नैंसी पाटीदार, श्रुति श्रीवास, ईशा कटियारे, स्वाति अत्रे, दीपक शर्मा, सुयश सोनी, ज्योति गौर , भारती चौधरी, एवं गणेश नीमजे सहित विश्वविद्यालय के अनेक प्राध्यापक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

इस अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के सफल आयोजन में स्वामी विवेकानंद स्कूल ऑफ मैनेजमेंट, टेकनों पार्क स्कूल ऑफ सीएस एंड आईटी एवं महर्षि कौटिल्य स्कूल ऑफ कॉमर्स का विशेष सहयोग रहा।

 

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