खंडवा — डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय में पूर्व राष्ट्रपति और महान शिक्षाविद् डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की 138वीं जयंती के अवसर पर शिक्षक दिवस समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय था “कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षक के अधीनस्थ”, जिसमें शिक्षकों की भूमिका और शिक्षा में नवाचार पर विचार-विमर्श हुआ।
🎓 कार्यक्रम की प्रमुख बातें:
समारोह के मुख्य अतिथि कुलगुरु डॉ. अरुण जोशी रहे, जबकि अध्यक्षता पूर्व कुलसचिव डॉ. रवि चतुर्वेदी ने की।
विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों को प्रशस्तिपत्र देकर सम्मानित किया गया।
डीन एकेडमिक डॉ. योगेश महाजन ने शिक्षण में क्रिटिकल थिंकिंग, कम्युनिकेशन, कोलेबोरेशन, क्रिएटिविटी और कैरेक्टर को अपनाने पर जोर दिया।
डीन प्लानिंग डॉ. शारदा दुबे ने नीति, नीयत और नेतृत्व को प्रभावी शिक्षा व्यवस्था का आधार बताया।
डीन रिसर्च डॉ. सीमा शर्मा ने रिसर्च, इनोवेशन और सोशल वेलफेयर के माध्यम से विद्यार्थियों को समस्या समाधान के लिए प्रेरित करने की बात कही।
🌱 नवाचार और पर्यावरणीय दृष्टिकोण: डॉ. शशिकांत शर्मा ने ‘ग्रीन टेक्नोलॉजी इन एग्रीकल्चर’ के अंतर्गत प्राकृतिक और पर्यावरणीय खेती को बढ़ावा देने पर बल दिया। डॉ. रवि चतुर्वेदी ने गुरु की भूमिका और महत्ता पर विचार रखते हुए कहा कि शिक्षक समाज के नैतिक स्तंभ हैं।
📚 कुलगुरु का संदेश: डॉ. अरुण जोशी ने शिक्षक के लिए चार सूत्र बताए — रिकग्नाइज, रिस्पेक्ट, असिमिलिएट और अप्लाई। उन्होंने कहा कि “शिक्षक की गुणवत्ता से ही शिक्षा में गुणवत्ता आती है।” उन्होंने कुलगुरु संतोष चौबे का संदेश भी साझा किया।
🏅 सम्मान और पदोन्नति: कार्यक्रम में पदोन्नति प्राप्त करने पर अनुपमा गौर, शारदा दुबे, सुष्री डिंडोरे, शशिकांत शर्मा और करण महाजन को आदेश पत्र प्रदान किए गए। सतीश पटेल और रोहन कुशवाह ने कुलगुरु और पूर्व कुलसचिव को प्रशस्तिपत्र भेंट किए।
🎤 संचालन और समापन: कार्यक्रम का संचालन नेहा शुक्ला ने किया और आभार मोहम्मद सगीर ने व्यक्त किया।
यह आयोजन न केवल शिक्षकों के योगदान को सम्मानित करने का अवसर बना, बल्कि शिक्षा में नवाचार, नैतिकता और पर्यावरणीय दृष्टिकोण को अपनाने की प्रेरणा भी प्रदान की।