खंडवा। डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय, खंडवा में रमन बाल विज्ञान पर्व के अंतर्गत 30 अक्टूबर को ब्राह्मी लिपि एवं प्राचीन पांडुलिपियों के अध्ययन, शोध, संरक्षण और संवर्धन पर विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारत की प्राचीन लेखन परंपरा एवं ऐतिहासिक धरोहर से परिचित कराना और उनके संरक्षण के प्रति जागरूक करना था।
कार्यशाला में नागपुर के पुरातत्व विशेषज्ञ एवं बीएनआईटी के पीएचडी शोधार्थी डॉ. आशीष जैन ने विद्यार्थियों को ब्राह्मी लिपि के ऐतिहासिक महत्व की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ब्राह्मी लिपि लगभग 2500 वर्ष पुराने भारतीय इतिहास का महत्वपूर्ण प्रमाण है। भारत में उपलब्ध लाखों प्राचीन पांडुलिपियों का संरक्षण हमारी सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक है।
डॉ. जैन ने विद्यार्थियों को पीपीटी के माध्यम से ब्राह्मी लिपि की गिनती, शून्य एवं बारहखड़ी का अभ्यास कराया। साथ ही भोजपत्र, ताम्रपत्र, प्राचीन ग्रंथों और समुद्रीय पुरातत्व से संबंधित विषयों पर भी मार्गदर्शन प्रदान किया। इस कार्यशाला के माध्यम से निमाड़ क्षेत्र के विद्यार्थियों को पहली बार प्राचीन ब्राह्मी लिपि को समझने और उसका अभ्यास करने का अवसर मिला।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. अनिल तिवारी ने कहा कि ऐसी कार्यशालाएं विद्यार्थियों को नए विषयों से परिचित कराने के साथ-साथ उनके शोध एवं करियर के नए अवसरों के द्वार खोलती हैं।
कुलगुरु डॉ. अरुण रमेश जोशी ने भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि ऐतिहासिक धरोहर और प्राचीन ज्ञान का संरक्षण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को पारंपरिक ज्ञान एवं आधुनिक शिक्षा से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
कार्यशाला ने विद्यार्थियों में भारतीय इतिहास, पुरातत्व, प्राचीन लिपियों और पांडुलिपि संरक्षण के प्रति रुचि विकसित करने के साथ-साथ शोध एवं कौशल विकास को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।