खंडवा। साहित्यकार, शिक्षाविद एवं विचारक जगन्नाथ प्रसाद चौबे ‘वनमाली’ की 114वीं जयंती के अवसर पर डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय, खंडवा में वनमाली सृजन केंद्रों का छठवां राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। दो दिवसीय इस राष्ट्रीय सम्मेलन में देशभर के विभिन्न राज्यों से लगभग 70 वनमाली सृजन केंद्रों के प्रतिनिधियों, साहित्यकारों, रचनाकारों एवं साहित्यप्रेमियों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगान, सरस्वती वंदना एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। सम्मेलन में खंडवा के शासकीय संगीत महाविद्यालय के कलाकारों एवं विद्यार्थियों द्वारा निमाड़ी लोकगीतों की मनमोहक प्रस्तुति दी गई। आयोजन के दौरान वनमाली जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर आधारित प्रदर्शनी और फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया।
सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में साहित्य एवं पुस्तक संस्कृति के संरक्षण-संवर्धन, रचनात्मक गतिविधियों, पुस्तक यात्रा, हिंदी ओलंपियाड, कविता पाठ तथा भारतीय भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत जैसे विषयों पर चर्चा एवं विचार-विमर्श हुआ। देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए रचनाकारों ने अपनी साहित्यिक प्रस्तुतियां भी दीं।
इस अवसर पर वनमाली सृजन पीठ की वेबसाइट का लोकार्पण किया गया तथा वनमाली जी के जीवन एवं साहित्यिक योगदान पर आधारित सामग्री का प्रदर्शन किया गया। विभिन्न सृजन केंद्रों के रचनाकारों की पुस्तकों का विमोचन भी किया गया।
कार्यक्रम में उत्कृष्ट साहित्यिक एवं रचनात्मक योगदान के लिए साहित्यकारों और वनमाली सृजन केंद्रों को सम्मान, स्मृति चिन्ह एवं सम्मान निधि प्रदान कर सम्मानित किया गया। सम्मेलन के दौरान ‘स्वाधीनता के गान’ सहित विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को राष्ट्रभक्ति और साहित्यिक भावनाओं से सराबोर कर दिया।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए वनमाली सृजन पीठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वरिष्ठ कवि-कथाकार संतोष चौबे ने कहा कि साहित्य, कला और संस्कृति का संरक्षण एवं नई पीढ़ी को इससे जोड़ना आज की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वनमाली सृजन पीठ का उद्देश्य साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को छोटे शहरों, कस्बों तथा ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाना और नई पीढ़ी के रचनाकारों को मंच प्रदान करना है।
आयोजकों ने कहा कि खंडवा विभिन्न सभ्यताओं और संस्कृतियों के मिलन का केंद्र रहा है। ऐसे राष्ट्रीय आयोजनों के माध्यम से देशभर के साहित्यकारों और रचनाकारों को एक मंच मिलता है तथा साहित्य एवं सांस्कृतिक संवाद को नई दिशा प्राप्त होती है।
डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय, खंडवा में आयोजित इस सम्मेलन ने साहित्य, संस्कृति, पुस्तक परंपरा और रचनात्मक अभिव्यक्ति के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में अपनी पहचान बनाई।