विश्व जल दिवस पर " जन जागृति से -जल जागृति " पर परिचर्चा हुई

Event Time & Date - Mon, March 23,2026

विश्व जल दिवस पर " जन जागृति से -जल जागृति " पर परिचर्चा  हुई 

( जल संरक्षण के लिए "जय जल ,जय जीवन " की शपथ ली) 

 खंडवा । डॉ . सी.वी.  रामन विश्वविद्यालय में विश्व जल दिवस के उपलक्ष्य में " जन जागृति से जल जागृति तक " शीर्षक पर एक परिचर्चा आयोजित की गई । कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जल संरक्षण विशेषज्ञ श्री अनिल सैनी थे । अध्यक्षता कुलपति डॉ. अरुण जोशी ने की । इस मौके पर छात्रों को वाटर वोलेंटियर के बैच प्रदान कर जल संरक्षण की शपथ दिलाई गई ।

   विश्वविद्यालय के  एस. रामानुजन स्कूल ऑफ साइंस के  इस आयोजन के राउंड टेबल डिस्कशन के माध्यम से वक्ताओं ने अपने विचार प्रस्तुत किए । 

      मुख्य  अतिथि वक्ता श्री अनिल सैनी ने जल संरक्षण के महत्व पर कहा कि प्रतिदिन भारत सहित पूरे विश्व में जल की उपलब्धता का महत्व बढ़ता जा रहा आहे । जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण के ह्रास की स्थिति में पेय जल प्राप्ति  एक कठिन समस्या बनती जा रही है ।  श्री सैनी ने जल संरक्षण में नागरिकों की जिम्मेदारी को महत्वपूर्ण बताया । उन्होंने इस दौरान देश के छः प्रमुख वाटर सिस्टम पर चर्चा की । भारत सरकार के जल मिशन और संरक्षण कार्यक्रम, वैश्विक स्तर पर जल अनुरक्षण और वितरण विषयों पर महत्वपूर्ण जानकारी दी । 

    विश्वविद्यालय के कुलसचिव श्री रवि चतुर्वेदी ने संवाद के माध्यम से वर्तमान में जल के अनावश्यक एवं लापरवाही से नष्ट  किए जाने की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि सामान्य घरेलू आर. ओ . प्लांट के माध्यम से केवल 40% जल उपयोगी होकर बाकी साठ प्रतिशत पानी बेकार बह जाता है जो कि चिंताजनक है,इसे रोका जाना आवश्यक है । श्री चतुर्वेदी ने कहा कि विश्वविद्यालय में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को पुनर्स्थापित कर सक्रिय बनाया  जाएगा । 

   विश्वविद्यालय के रिसर्च एवं इनोवेशन सेल की निदेशक डॉ. सीमा शर्मा ने विश्वविद्यालय के माध्यम से नगर के ऐतिहासिक जल स्रोतों के सैंपल और विश्वविद्यालय द्वारा मोरिंगा ऑयल से जल शुद्धिकरण और ई -कोलाई बैक्टीरिया नियंत्रण  के रिसर्च परिणामों पर जानकारी दी । उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश शासन और विश्वविद्यालय के सहयोग से बबल प्यूरीफायर सिस्टम से पदमकुंड में जल शुद्धिकरण किया जायेगा । इसी तारतम्य में प्राध्यकगणों डॉ. शारदा दुबे ,श्री निश्रेयस व्यास , सुश्री कृतिका गीते और ब्रजेश मंडराई ने भी परिचर्चा में विचार रखे । अंत में अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति डॉ. अरुण जोशी ने नदी विज्ञान और जल संरक्षण विषयों पर रिसर्च कार्य के लिए आव्हान किया । उन्होंने विश्व में बढ़ते संघर्ष और असुरक्षा में पानी की भूमिका को भी कारण बताया । नदियों के समाप्त होते अस्तित्व पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि अत्यधिक रेत उत्खनन और प्रदूषण से यह खतरा बढ़ रहा है। डॉ. जोशी नदी विज्ञान विषय के पक्षधर एवं पुरोधा हैं। उन्होंने कहा कि  डॉ. सी.वी. रामन विश्वविद्यालय में नदी विज्ञान विषय का डिप्लोमा कोर्स प्रारंभ किया जा रहा है । इसमें छात्र नदी घाटी सभ्यता , नदियों का सांस्कृतिक संबंध ,नदी अर्थशास्त्र, जल संरक्षण   आदि विषयों को पढ़ेंगे । 

  कार्यक्रम के अंत में "जय जल जय जीवन " शीर्षक पर जल संरक्षण की शपथ ली गई । कार्यक्रम का संचालन डॉ. अनुपमा गौर ने किया आभार सुश्री श्रेया मालवीय ने व्यक्त किया ।

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