खंडवा। डॉ सी वी रमन विश्वविध्यालय में एन.ई.पी. सारथी गतिविधि के अंतर्गत भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्र
द्वारा “पारंपरिक ज्ञान एवं आधुनिक शिक्षा का सहयोजन” विषय पर विशिष्ट व्याख्यान
का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शोधार्थियों
एवं प्राध्यापकों की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही तथा ज्ञान, संस्कृति
और भारतीय चिंतन परंपरा पर सार्थक संवाद स्थापित हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं अन्य
गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर श्रीमती गीतिका
चतुर्वेदी उपस्थित रहीं। साथ
ही सारथी समन्वयक श्री शिवम
इंगला, गतिविधि समन्वयक एवं डीन डॉ.
योगेश महाजन, सह-समन्वयक
प्रो. ज्योति गौर वर्मा सहित विश्वविद्यालय परिवार के प्राध्यापकगण एवं
विद्यार्थी बड़ी संख्या मे उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के बीज वक्ता आचार्य श्री प्रभु
नारायण मिश्र ने अपने व्याख्यान में
भारतीय ज्ञान परंपरा की वैज्ञानिकता एवं जीवनोपयोगी स्वरूप पर विस्तार से प्रकाश
डाला। उन्होंने वेदों एवं शास्त्रों में निहित ज्ञान को आधुनिक शिक्षा से जोड़ते
हुए बताया कि भारतीय चिंतन केवल आध्यात्मिक नहीं बल्कि व्यवहारिक जीवन का
मार्गदर्शक है। रामायण एवं महाभारत के विभिन्न प्रसंगों और अध्यायों के माध्यम से
उन्होंने नैतिक मूल्यों, कर्तव्यबोध तथा
जीवन प्रबंधन के सिद्धांतों को सरल उदाहरणों के साथ समझाया। साथ ही विद्यार्थियों
द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर देकर उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया।
इस अवसर पर कुलसचिव श्री रवि चतुर्वेदी ने अपने
उद्बोधन में भारतीय ज्ञान परंपरा को दैनिक जीवन में आत्मसात करने की आवश्यकता पर
बल दिया। उन्होंने रामायण एवं महाभारत के उदाहरण देते हुए कहा कि हमारे प्राचीन
ग्रंथ जीवन को सही दिशा देने वाले मार्गदर्शक हैं।
अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलगुरु श्री अरुण
रमेश जोशी ने राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए भारतीय संस्कृति,
भाषा और परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने
कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि
वर्तमान और भविष्य के निर्माण का सशक्त आधार है। भारतीय चिंतन की विशेषता उसके
सूत्रात्मक ज्ञान में निहित है, जो जीवन के गहन
सिद्धांतों को सरल और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करता है। इस संदर्भ में उन्होंने
‘लॉ ऑफ एफोरिज़्म’ के पाँच सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा की
वैज्ञानिक एवं जीवनोपयोगी दृष्टि को स्पष्ट किया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि का औपचारिक स्वागत एवं
स्वागत उद्बोधन डॉ. योगेश महाजन द्वारा प्रस्तुत किया गया, जबकि
मुख्य अतिथि का परिचय प्रो.नेहा शुक्ला ने दिया। कार्यक्रम मे मंच संचालन प्रो.
ज्योति गौर वर्मा द्वारा किया गया तथा अंत में प्रो. देवास उईके ने आभार प्रदर्शन करते हुए सभी अतिथियों एवं सहभागियों के
प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।