डॉ. सी. वी. रमन विश्वविद्यालय में आयोजित सात दिवसीय “वनमाली लेखन सृजन शाला” का समापन आज हुआ। समापन सत्र में “यात्रा वृत्तांत लेखन कौशल” विषय पर डॉ. आलोक सेठी ने विषय विशेषज्ञ के रूप में मार्गदर्शन दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलगुरु डॉ. अरुण जोशी ने की।
महर्षि कर्वे मानविकी कला एवं भाषा अध्ययन शाला के माध्यम से वनमाली सृजन पीठ खंडवा द्वारा आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य छात्रों में लेखन, पठन एवं रचनात्मकता को बढ़ावा देना तथा लेखन की विभिन्न विधाओं के प्रति रुचि विकसित करना था। 11 मार्च से 17 मार्च तक आयोजित इस कार्यशाला में प्रतिभागी छात्र एवं प्राध्यापकों ने लघुकथा, कविता, समीक्षा, व्यंग्य लेखन, रिपोर्ताज, डायरी लेखन तथा यात्रा वृत्तांत जैसी गद्य विधाओं की तकनीकों का अध्ययन एवं अभ्यास किया।
कार्यशाला के दौरान विभिन्न दिवसों पर विशेषज्ञों द्वारा अलग-अलग विधाओं पर प्रशिक्षण दिया गया। प्रथम दिवस पर श्री गोविंद शर्मा जी ने विद्यार्थियों को लघुकथा लेखन की तकनीकों से अवगत कराया। द्वितीय दिवस पर श्री अरुण सातले जी ने कविता लेखन के माध्यम से भाव, संवेदना एवं भाषा-शैली की सुंदरता पर प्रकाश डाला। तृतीय दिवस पर श्री शैलेन्द्र शरण जी ने विद्यार्थियों को समीक्षा लेखन की प्रक्रिया एवं उसके महत्व को समझाया। चतुर्थ दिवस पर श्री कैलाश मंडलेकर जी ने व्यंग्य लेखन एवं श्री जय नागड़ा जी ने रिपोर्ताज लेखन की विधाओं से विद्यार्थियों को परिचित कराया। पंचम दिवस पर श्री आनंद पेंडसे जी ने विद्यार्थियों को डायरी लेखन एवं संस्मरण लेखन की कला का प्रशिक्षण दिया। षष्ठम दिवस पर डॉ आलोक सेठी जी द्वारा विद्यार्थियों को यात्रा-वृत्तांत लेखन के विविध पक्षों से अवगत कराया गया। साथ ही प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।
समापन दिवस पर स्वागत उद्बोधन देते हुए वनमाली सृजन पीठ की संयोजक श्रीमती गीतिका चतुर्वेदी ने कहा कि वर्तमान समय में युवा वर्ग मोबाइल एवं इंटरनेट के कारण समाचार पत्र-पत्रिकाओं के पठन-पाठन और लेखन कार्य से दूर होता जा रहा है, जिससे लेखन कौशल में कमी देखी जा रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए छात्रों को पुनः लेखन की ओर प्रेरित करने के उद्देश्य से इस कार्यशाला का आयोजन किया गया।
अध्यक्षीय वक्तव्य में कुलगुरु डॉ. अरुण जोशी ने कहा कि लेखन कौशल जीवन में सफलता प्राप्त करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति जीवन में आगे बढ़ना चाहता है, तो उसे अपनी लेखन क्षमता को सुदृढ़ करना आवश्यक है। लेखन एक शक्ति है और यह जीवनभर की अमूल्य पूंजी है।
मुख्य अतिथि डॉ. आलोक सेठी ने अपनी आकर्षक शैली में यात्रा वृत्तांत लेखन की बारीकियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने लेखन की तकनीकों के साथ अपने अनुभव भी साझा किए और प्रतिभागियों को प्रेरित किया कि वे यात्रा के दौरान अपने दैनिक अनुभवों को सरल भाषा में लिखें। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया लेखन को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाने का एक सशक्त मंच है। साथ ही उन्होंने प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उपयोगी लेखन टिप्स भी दिए।
कुल सचिव श्री रवि चतुर्वेदी ने हिंदी भाषा में अभिव्यक्ति की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पठन-पाठन के अभ्यास में कमी के कारण अभिव्यक्ति स्तर कमजोर हो रहा है। उन्होंने प्राध्यापकों से छात्रों को निरंतर मार्गदर्शन देने का आग्रह किया।
इस अवसर पर वनमाली सृजन पीठ के अध्यक्ष श्री गोविंद शर्मा एवं सचिव श्री श्यामसुंदर तिवारी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में ए. आर. श्रीमती ज्योति चतुर्वेदी, देवास उइके, जस्सू रावत, एन. व्यास, चंद्रकांत टैंबे सहित अनेक प्राध्यापक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. सुरभि डिंडोरे ने किया। संचालन श्रीमती ज्योति गौर द्वारा तथा आभार प्रदर्शन डॉ. नुसरत आरा शेख ने किया। अंत में प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र एवं पुरस्कार वितरित किए गए।