विश्वविद्यालय में IPR (Intellectual Property Rights) वर्कशॉप के अंतर्गत कोर्स 4 का सफल आयोजन किया गया। इस सत्र का विषय था “Techno-Legal Considerations: Scientist Perspective and Implications”, जिसमें वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी विकास से जुड़े कानूनी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
इस सत्र में अमेरिका के इंडियाना वेस्टफील्ड से आए विशेषज्ञों ने भाग लिया और पेटेंट से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने पेटेंटेबिलिटी (Patentability), अनुसंधान परिणामों की सुरक्षा, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, तथा नवाचार में नैतिक जिम्मेदारियों जैसे प्रमुख मुद्दों को सरल और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया।
विशेषज्ञों ने भारत, अमेरिका और ब्राज़ील के पेटेंट कानूनों के विभिन्न पहलुओं की भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने इन तीनों देशों के पेटेंट कानूनों की तुलना करते हुए बताया कि अलग-अलग कानूनी ढांचे किस प्रकार अनुसंधान और नवाचार को प्रभावित करते हैं। साथ ही, पेटेंटेबिलिटी से जुड़े विभिन्न परिदृश्यों (scenarios) को भी स्पष्ट किया गया, जिससे प्रतिभागियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बौद्धिक संपदा की समझ विकसित करने में मदद मिली।
इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, शोधार्थी और विद्यार्थियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। सभी प्रतिभागियों ने इस सत्र से यह महत्वपूर्ण समझ प्राप्त की कि किस प्रकार वैज्ञानिक खोजों और नवाचारों को प्रभावी रूप से संरक्षित किया जा सकता है और उन्हें समाज तथा उद्योग के हित में उपयोग में लाया जा सकता है।
यह वर्कशॉप विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उत्कृष्टता (Academic Excellence) और नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई।